Wi-fi एक ऐसी तकनीक है जोकि डिवाइसिज को बिना इंटरनेट कॉर्ड के संवाद अनुमति प्रदान करती है।तकनीकी विशिष्टीकरण के लिए wifi नेटवर्क द्वारा एक बेतार लैन (wireless lokel area network) का प्रतिनिधित्व किया जाता है। जोकि 802.11 AEEEE नेटवर्क मानक पर काम करता है।

आज, वाई-फाई एक निश्चित स्थान के अंदर सबसे लोकप्रिय वायरलेस डेटा संचार तकनीक है और साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कम्पनियो को LAN के माध्यम जोड़े रखने में wifi सन्धि एक ट्रेडमार्क है।

परन्तु,क्या आप जानते है कि wifi का आखिर आया कैसे?तो आइए आज हम इसी पर बात करते है। Wifi आविष्कार की कहानी ब्लैक होल्स और उनकी रेडियो तरंगों को वाष्पित करने के स्टीफन हॉकिंग के सिद्धांत पर खोज से आती है John O’Sullivan नामक एक वैज्ञानिक जोकि इस सिद्धांत से प्रेरित थे और इसे सही साबित करना चाहता थे ने अपने शोध में ऐसे कमजोर सिग्नल(रेडियो वेव्स)की खोज की जिन्हें इंटियर ब्रह्मांड की तेज रेडियो किरणों के शोर से बाहर कर पाना काफी मुश्किल था। उन्होंने अपने शोध से यह निष्कर्ष दिया कि चूंकि यह खोजे रेडियो सिग्नल्स ब्रह्मांड में एक तो लम्बी दूरी तय करते है,साथ ही ये बहुत ही कम होते है और अंतरिक्ष मे धूल व गैस से विकृत हो जाते है।

इसलिए, उनका पूरा तरंग एक फ्लैट वक्र में एक तेज और आसानी से पहचानने योग्य रूप से बदलता है। तो O’Sullivan और उनके साथियों को एक ऐसे उपकरण पर काम करना पड़ा जो किसी भी प्रकार की रेडियो तरंगों की पहचान और फ़िल्टर कर सके।

और अंत में, O’Sullivan और उनके साथी इस तरह का उपकरण बनाने में सफल रहे, जो गणितीय सूत्र पर आधारित था,जोकि उन्हें अन्य अनावश्यक रेडियो संकेतों को अवरुद्ध करके और उपयोगी को पहचानकर खोजने में मदद कर सकता था। हालांकि दुर्भाग्य वश वे ब्लैक होल रेडियो तरंगों को पकड़ने में कामयाब तो नही हो सके परन्तु वे अब WiFi युग की नींव रख चुके थे।

यह बात 1992 के ठीक बाद कि है, जब O’Sullivan ,CSIRO के एक खोजी दल में शामिल हुए।जो कंप्यूटर टू कंप्यूटर को वायर लेस तरीक़े से जोड़ने पर काम कर रहा था।

वही O’Sullivan को अचानक ब्लैक होल की रेडियो तरंगों और उस पर उनके द्वारा बनाए गए उपकरणों के पिछले शोध के बारे में विचार आया। चूंकि उनके द्वारा विकसित किए गए टूल वायरलेस रूप से सिग्नल की पहचान करने में सक्षम थे। इसलिए, उन्होंने कंप्यूटर के बीच वायरलेस संचार के विकास के लिए ब्लैकहोल रेडियो तरंगे पकड़ने के दौरान प्रयुक्त गणितीय सूत्र का उपयोग करने का निर्णय लिया। उन्होंने पाया कि अपने पिछले शोध को संशोधित कर Wi fi के लिए एक मजबूत आधार ही नही वरन पेड़ तैयार कर सकते है और इस तरह ब्लैकहोल पर की जा रही खोज आज के WiFi पर जाकर काम आयी।

पिछले शोध की पुनः प्रयोज्यता के कारण WiFi को अनजान अविष्कार की सूची में रखा गया।वही इसके लिए CSIRO $1 बिलियन रॉयल्टी का पात्र माना गया।जिसके उपरांत O’Sullivan द्वारा 1992 में उनके अपने मूल देश ऑस्ट्रेलिया में पहली बार WiFi टेक्निक का पेटेंट कराया गया,वही 1996 में अमेरिका द्वारा।

आखिरकार हमने जाना कि वाई-फाई प्रौद्योगिकी एक आकस्मिक आविष्कार था। O’Sullivan को प्रेरित करने के लिए स्टीफन हॉकिंग धन्यवाद। और, धन्यवाद,O’Sullivan का वाई-फाई की दुनिया बनाने के लिए।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here