हमारे पास सैकड़ो प्रकाशवर्ष दूर के पिंडो,ग्रह,तारे और आकाश गंगाओं की तस्वीर है।चूंकि यहां आमतौर पर विचार किया जा सकता है कि अब ब्रह्मांड में आखिर अब क्या रह गया?परन्तु ब्रह्मांड में एक पिंड ऐसा भी है जिसके बारे में हम सालो से बात कर रहे है पर उसे देख नही पाए या शायद देख भी ना सके और वो है “ब्लैक होल”।हम हर एक पिंड के लिए स्प्ष्ट चित्र की बात कर सकते हैं पर ब्लैक होल के मामले में हमे इमेज होरिजन टेलिस्कोप की छवियों का ही इंतजार है।चूंकि इमेज होरिजन टेलिस्कोप की मदद से ब्लैक होल के आसपास के वातावरण को ही चित्रित किया जा सकेगा क्योकि हम कभी भी ब्लैक होल की स्प्ष्ट छवि प्राप्त ही नही कर सकते,जोकि तकनीकी रूप से असम्भव है।

ब्लैकहोल यानी काला छिद्र असल मे वो ब्रह्मांडीय पिंड है जिस में डलने वाली कोई भी वस्तु कभी वापस नही आती,फिर वो चाहे प्रकाश ही क्यो ना हो।दरअसल जब किसी तारे का जलने वाला ईंधन पूर्ण समाप्त हो जाता है तो उसके बाद उस तारे के पास विशाल गुरुत्वाकर्षण के कुछ नही बचता और इसी गुरुत्वाकर्षण के कारण वह अपने आप मे सिकुड़ने लगता है, तब तक जब तक कि वह अपने सिमुलेट पॉइंट (अंतिम बिंदु) में नही सिमट जाता है।सिमुलेट पॉइंट पर तारा गुरुत्वाकर्षण के इतना अधीन होता है कि उससे किसी भी वस्तु का निकलना असम्भव होता है,यहां तक की प्रकाश का भी नही।

क्यो अदृश्य रहेगा ब्लैक होल

हम जानते है कि किसी वस्तु की दृश्यता उसके ऊपर पड़ने वाले प्रकाश का रिफ्लेक्शन होती है अर्थात कोई वस्तु जब अपने ऊपर पड़ने वाले प्रकाश को परावर्तित करती है तो हमे वह दिखाई देती है।उदाहरण के तौर पर यदि हम कोई फूल लाल दिखाई देता है तो इसका मतलब यह है कि उस फूल द्वारा लाल रंग का प्रकाश परावर्तित किया जा रहा है।वही जब कोई वस्तु अपने ऊपर पड़ने वाला समस्त प्रकाश परावर्तित कर देती है तो वो हमें सफेद और समस्त प्रकाश सोख लेती है तो काली दिखाई पड़ती है।अब चूंकि ब्लैक होल से प्रकाश भी बाहर नही निकलता तो इसलिए ब्लैक होल चित्र के नाम पर हमारे पास काली छाया के अलावा कुछ नही पाते।तो इसलिये हमे इस घने अंतरिक्ष ने ब्लैकहोल के आसपास की गुरुत्विक गतिविधियों से उसके होने का अंदाजा ही लगाना पड़ता है।

ब्लैक होल के न दिखने का एक कारण इसका रहस्यमयी पिंड होना भी हो सकता है।दरअसल आइंस्टाइन ने की थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी कहती है कि समय भी रिलेटिव होता है ,जिसके अनुसार उच्च गुरुत्वाकर्षण वाले पिंडो पर समय धीमा होगा।वही कयास यहां तक भी है ब्लैकहोल दो समयों को जोड़ने वाला माध्यम भी है और अगर ऐसा है तो फिर ऐसे में ब्लैकहोल को असल मे समान रूप से अनुभूतित करना असम्भव होगा।

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चूंकि हम जानते है किसी वस्तु का रंग उस पर पड़ने वाले प्रकाश का परावर्तन है,तो लाल फूल लाल रंग का परावर्तन होता है।तो देखा जाए तो लाल फूल लाल रंग का नही बल्कि उसे छोड़कर अन्य रंगों का होता है।क्योंकि उसने लाल को बाहर फेकते हुए अन्य को सोंख लिया है।

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