आपमे से शायद कोई ही हो जिसने आज बिटकॉइन का नाम ना सुन रखा हो और शायद आपमे से कुछ ने तो इसमें कभी ना कभी इन्वेस्ट बजी किया हो सकता है।हम जानते है कि बिटकॉइन एक ऐसी वर्चुअल करन्सी है जिसे बिना किसी बैंक आदि को बीच मे लिए बगैर एक व्यक्ति से दूसरे तक लेनदेन किया जा सकता है।तो यहां एक सवाल आता है कि बिटकॉइन और अन्य वर्चुअल करन्सी काम कैसे करती है,चूंकि यहां हमारा पैसा जोकि वर्चुअल करन्सी के रूप में है कि देखभाल या निगरानी को कोई बैंक आदि नही है तो फिर इसकी सुरक्षा की क्या गारंटी है और कौन इस पैसे पर नजर रखता है?तो चलिए आज हम इसी के बारे में बात करते है।

ब्लॉक चैन

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असल मे बिटकॉइन या जितनी भी करन्सी है वो जिस टेक्नोलॉजी पर काम करती है उसका नाम है “ब्लॉक चैन”।अब जैसा कि नाम से ही पता चल रहा है तो ब्लॉक चैन ,वर्चुअल ब्लॉक्स की एक श्रंखला होती है,जहां इंटरनेट के माध्यम से कई कम्प्यूटर्स सर्वर एक दूसरे से जुड़े रहते है और यही वो विधि है जो बिटकॉइन जैसी करन्सी के आदान प्रदान में काम आती है।

काम कैसे करती है ब्लॉक चैन–

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ब्लॉकचैन क्लाउड कंप्यूटरिंग का ही एक रूप है, जिसमे ब्लॉक चैन की कंप्यूटर सर्वर ब्लॉक कि एक श्रंखला होती है।तो मान लीजिए अनीश कोई व्यक्ति है और उसे अपने दोस्त विजय को बिटकॉइन के रूप में कुछ मुद्रा भेजनी है, तो अनीश अनीश अपने अपने मोबाइल या सिस्टम से अपने बिटकॉइन वॉलेट से विजय को पैसे भेजने के लिए अपनी कार्यवाही कर देता है।

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अब चूंकि अगर वह पैसे को वर्चुअल करन्सी के रूप में ना भेजता तो उसे किसी थर्ड पार्टी जैसे बैंक, Paytm आदि की जरूरत होगी। क्योंकि यही वो तत्व है जो आपके लेनदेन का लेखा -जोखा रखते है और ठीक ऐसा ही काम ब्लॉक चैन में ब्लॉक्स का होता है।

ये ब्लॉक भी आपके लेन-देन के ही भी खाते होते है। परंतु क्या हो कि आपके बैंक सर्वर अचानक से फेल हो जाये ,या बैंक या किसी अन्य सर्वर से आपका सारा ब्यौरा ही मिटा दिया जाए (हैकिंग आदि के द्वारा)? यह एक गम्भीर सवाल है क्योंकि यहां बात चिल्लरो की नही बड़ी रकम की हो रही है तो जाहिर है कि अक्सर ऐसे खतरे इन पर मंडराते ही रहते है।

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परंतु ब्लॉक चैन में ऐसा नही होता।तो जब यहाँ अनीश या कोई अन्य किसी को कुछ करन्सी या जानकारी भेजता है तो यह कई सर्वर के ब्लॉक से होकर जाती है और सभी ब्लॉक में यह जानकारी सार्वजनिक रूप से सेव होती है अर्थात उस ब्लॉक चेन का प्रयोग करने वाला हर व्यक्ति इस लेनदेन को देख रहा होता है।

चूंकि यह जानकारी ब्लॉक चेन के हर ब्लॉक में समान रूप में होती है तो अगर कोई किसी एक-दो ब्लॉक फेल हो जाये या कोई हैक भी कर ले तब भी हमारा खाता सुरक्षित रहता है क्योंकि यहाँ एक दो नही बल्कि लाखो लाखो कंप्यूटर एक दूसरे से जुड़े होते है और इन सबको हैक कर जानकारी चोरी करने की संभावना न के बराबर होती है।

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अब आपके मन मे यह सवाल होगा कि अगर ब्लॉक चेन का प्रयोग लाखो करते है और हम भी ,तो पास तो हमारे लें देन की सारी जानकारी होगी।तो हैं ये सच है होगी परन्तु आप यहां एक सहूलियत यह है कि यहां लेनदेन की जानकारी यूजर नाम या कोड से जुड़ी होती है ना कि आपके असली नाम से और सबसे बड़ी बात यह है कि ब्लॉक चेन टेक्नोलॉजी कभी भी IP address को लेकर कोई परमिशन नही लेती अर्थात बस आप जानकारी ब्लॉक्सके भेजो बस इतना ही ।बाकी आपसे किसी को कोई मतलब नही है।यही कारण है कि कई बड़े देशो में जिसमे भारत बजी शामिल है उद्योगपति ब्लॉकचैन टेक को मंजूरी के पक्ष में खड़े है।

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हालांकि बिटकॉइन की शुरुआत 2008 में “सतोषि नाकामोटो” ने की थी और यही से ब्लॉकचैन की अहमियत सामने आती है। परन्तु यह कोई नई टेक्नोलॉजी नही है। बिटकॉइन के आविष्कार से करीब 17 साल पहले 1991 में Stuart Haber और W. Scott Stornetta क्रिप्टोग्राफी को को सुरक्षित करने के लिए ब्लॉक्स की श्रंखला पर काम कर रहे थे जिसके अंतर्गत टाइमस्टम्प डॉक्यूमेंट के साथ छेड़छाड़ ना कि जा सके।

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1992 में Bayer, Haber और Stornetta ने इसी विचार को आगे बढ़ाया और इसे लैब से निकाल कर इसका विस्तृत रूप तैयार करने की योजना तैयार की और यही से जन्म हो ब्लॉकचैन का।

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