मंगल की हालत अब उस जमीन की जैसी हो गयी है जिस पर भूमाफियाओं की पैनी नजर है। क्योकी भूमाफिया यानी इंसान जल्द से जल्द मंगल पर जाने की फिराक में है फिर चाहे वह अमेरिकी मंगल मिशन हो,रूसी मंगल मिशन हो या फिर हमारा अपना चहेता मंगलयान मिशन। वही जापान ,चीन जैसे अलग अलग देश भी अपने मंगलमिशन की तैयारी में है और अगर बात रियल टोनी स्टार्क यानी मस्क की बात करे तो उनकी कम्पनी स्पेसएक्स 2024 में मानव मंगल मिशन की योजना पर बड़ी शिद्दत से लगी हुई है।वही इसी कड़ी में अमेरिकी अंतरिक्ष संस्था नासा ने एक और घोषणा कर दी है और वो “मार्स हेलीकॉप्टर” को मार्स पर उतारने की ।

जीहां नासा 2020 में अपने अगले मंगल मिशन के मार्स हेलीकॉप्टर नामक रोवर को मार्स पर भेजने की तैयारी कर रही है।इसके मार्स पर 2021 तक पहुंचने की संभावना है।वही 10 वर्ष के अंदर यह मार्स पर नासा का दूसरा मिशन होगा जब नासा मंगल की सतह पर अपना कोई ऑब्जेक्ट उतरेगा। इससे पहले नासा द्वारा क्यूरियोसिटी बग्घी को26 नवम्बर 2011 में लांच किया गया था जोकि मंगल पर 6 अगस्त 2012 में उतरी था। वही उसी के दूसरे संस्करण कस रूप में मार्स हेलिकॉप्टर स्काउट ( MHS )को मंगल के लिए रवाना किया जाएगा ।

मार्स हेलिकॉप्टर स्काउट ( MHS ) यह एक रोबोटिक हेलीकॉप्टर है,जो मंगल पर अध्य्यन के लिए दिलचस्प लक्ष्य की खोज करेगा और उन पर तकनीकी परीक्षण करेगा और साथ ही भविष्य में मार्स पर भेजे जाने वाले रोवर्स आदि के लिए एक ड्राइविंग मार्ग प्रशस्त करेगा।

वैज्ञानिकों ने बताया कि इस हेलीकॉप्टर का भार 1.8 किलोग्राम से ज्यादा नहीं है। इस प्रोजेक्ट का बहुत बारीकी से परीक्षण किया जा रहा है, ताकि यह मंगल के वातावरण में बिना बाधा काम कर सके। बताया कि हेलीकॉप्टर को मंगल में बहुत ही कम तापमान में उड़ान भरनी होगी यह तापमान माइनस 90 डिग्री सेल्सियस भी हो सकता है। यह जुलाई 2020 रॉकेट के माध्यम से मंगल के लिए उड़ान भरेगा और तय कार्यक्रम के अनुसार हेलीकॉप्टर फरवरी 2021 में मंगल पर पहुंचेगा।

प्रोजेक्ट मैनेजर मिमि आंग ने बताया कि पृथ्वी पर मंगल जैसा वातावरण बनाकर हेलीकॉप्टर का परीक्षण करना बहुत ही ज्यादा मुश्किल काम था। आंग ने बताया कि मंगल ग्रह के वायुमंडल का घनत्व पृथ्वी के वायुमंडल के घनत्व का मात्र एक प्रतिशत है। आंग ने सफल परीक्षण के बाद खुशी जताते हुए कहा कि हम निश्चित ही मंगल पर हेलीकॉप्टर उड़ाने जा रहे हैं।

आंग ने आगे परीक्षण के बारे में बताया कि टीम ने इस परीक्षण के लिए एक वैक्यूम बनाया। उसके अंदर से नाइट्रोजन, ऑक्सीजन और अन्य गैसों को निकाल दिया गया। इसके बाद उसमें कार्बन डाइऑक्साइड और मंगल के वायुमंडल के मुख्य घटकों को डाल दिया गया।

जेपीएल में हेलीकॉप्टर की परीक्षण कंडक्टर टेडी टेजेटोस ने बताया कि इसी तरह से उन्होंने पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण को भी दो तिहाई तक कम कर दिया, क्योंकि मंगल का गुरुत्वाकर्षण बहुत कमजोर हैं। महज एक मिनट की उड़ान सफलतापूर्वक रही है। आंग ने बताया कि यह हेलीकॉप्टर कार्बन फाइबर, फ्लाइट ग्रेड एल्युमिनियम, सिलिकान, तांबा आदि से मिलकर बना है। इसमें सोलर पैनल हैं जो बैटरियों को चार्ज करेंगे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here