स्टीफेन हॉकिंग जैसे महान वैज्ञानिकों ने अपना पूरा जीवन ब्लैकहोल को जानने ,समझने और समझाने में लगा दिया वही साल 1998 में एक भारतीय वैज्ञानिक आभास मित्रा ने यह कहकर पूरी दुनिया को चौका दिया कि “असल मे खोजे गए जिन पिंडो को हम ब्लैक होल समझ रहे है वो वास्तविक ब्लैक होल नही है।डॉ आभास मित्रा ने बताया कि असल मे आदर्श ब्लैकहोल जैसी कोई चीज इस ब्रह्मांड में है ही नही,बल्कि अब तक जितने भी पिंड जिन्हें ब्लैक होल कहा जा रहा है,वे सब ब्लैक होल जैसे गुण रखते है।

डॉ आभास मित्रा ने बताया कि असल मे आदर्श ब्लैकहोल जैसी कोई चीज इस ब्रह्मांड में है ही नही,बल्कि अब तक खोजे गए जितने भी पिंड जिन्हें ब्लैक होल कहा जा रहा है Eternally Collapsing Object (E C O,सदा गिरने वाले ऑब्जेक्ट) है।

हालांकि शुरुआत में डॉ मित्रा की इस रिसर्च को कोई खास तवज्जो नही दी गईं।लेकिन उसके कुछ सालो बाद जब वैज्ञानिक “Darryl leiter और Stanly Robertson” ने अपनो रिसर्च में मित्रा के सही होने की बात कही तो ब्लैकहोल अस्तित्व की बहस तेजी से उभरी।उन्होंने अपनी रिसर्च में इन ऑब्जेक्ट्स को Magnetospheric Eternally Collapsing Object(MECO) नाम दिया।

आखिर क्या अंतर है ECO(MECO) और Black hole में:हम जानते है कि ब्लैक होल तब बनता जब कोई विशालकाय तारा ईंधन खत्म होने पर अपने गुरुत्वाकर्षण के कारण सिमुलेटिड पॉइंट तक सिकुड़ जाए,यहां पर पहुंच कर इस विशालकाय तारे के पास सिर्फ उसकी ग्रैविटी ही बचती है,जिसके बारे मे हर कोई जानता है कि इससे प्रकाश भी पार नही पा सकता।चूंकि एको भी बिल्कुल समान प्रक्रिया के कारण बनते है ,परन्तु जहां ब्लैक होल एक समय आने पर सिमुलेट पॉइंट में सिमट जाते है,वही एको में यह गुरुत्वाकर्षण के अधीन सिकुड़ने की यह प्रक्रिया ना खत्म होने वाली होती है।

जिसका कारण यह है की सुपरनोवा विस्फोट के उपरांत ब्लैकहोल की ही तरह इको जब अपने चमकने की अंतिम पड़ाव पर पहुंच जाता है तो यह कोर के Internal Collaps को काफी धीमा मतलब इतना कर देता है ,जिसके कारण उस जगह से उसके सिमुलेटिड पॉइंट तक पहुचने की गणना सम्भव नही है।चूंकि ECO अपने गुरुत्व केंद्र की और लगातार सिकुड़ता रहता है अर्थात गिरता रहता है,इसलिए इसका नाम Enternally collaps object(सदैव गिरने वाला)या उच्च चुम्बकीय प्रभाव वाला(Magnetospheric Eternally Collapsing Object(MECO) है।

हालांकि वैज्ञानिक तौर पर इस सिद्धांत को अभी मान्यता नही दी गयी है,परन्तु इसे कभी नकारा भी नही गया है।क्योंकि हकीकत यही है कि ब्लैकहोल के बारे में क्या सटीक कोई भी दावे के साथ नही कह सकता।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here