सरो प्रमुख के सिवन ने बीते ब्रहस्पतिवार 13जून 2019  को घोषणा करते हुए है कहा कि जल्द ही भारत के पास अपना स्पेस स्टेशन होगा,जिसके माध्यम से अन्तरिक्ष सूर्य और वीनस जैसे ग्रहों की बेहतर जानकारी प्राप्त की जा सकेगी| सिवान ने कहा किहै ऐसे में जब देश अन्तरिक्ष के क्षेत्र में ऊँची छलांग लगते हुए लगातार नेट्रत्व में अग्रसर हो रहा, वहां ऐसे अन्तरिक्ष प्रोग्राम युवा दिमागों प्रेरित क्र अन्रिक्ष टेक्नोलॉजी की और आकर्षित करेगे |

इसरो प्रमुख ने आगे कहा कि चंद्रयान अभियान 2 जिसे चंद्र अभियान 2 भी कहा जाता है, के बाद इसरो सूर्य को लेकर अभियान शुरू करेगा. इसके तहत 2020 की पहली छमाही में आदित्य एल1 लॉन्च किया जाएगा.

शुक्र के लिए एक और अंतरग्रहीय अभियान को अगले 2-3 वर्षों में लॉन्च किया जाएगा. सिवन अतंरिक्ष विभाग के सचिव भी हैं. अतंरिक्ष मिशन को स्पष्ट करते हुए सिवन ने कहा कि यह मिशन गगनयान कार्यक्रम का विस्तार होगा.

सिवन ने कहा, ‘हमे गगनयान कार्यक्रम को बनाए रखना होगा, इसलिए वृहद योजना के तहत हम भारत में अंतरिक्ष स्टेशन की योजना बना रहे हैं. हम मानव युक्त चंद्र अभियान के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय का हिस्सा होंगे. हमारे पास अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए स्पष्ट योजना है.

हम अलग अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने की योजना बना रहे हैं. हम (आईएसएस) उसका हिस्सा नहीं हैं. हमारा अंतरिक्ष स्टेशन बहुत छोटा होगा. हम एक छोटा मॉड्यूल लॉन्च करेंगे, जिसका इस्तेमाल माइक्रोग्रैविटी प्रयोग के लिए किया जाएगा.

अंतरिक्ष स्टेशन का वजन करीब 20 टन होने की संभावना है. उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष स्टेशन की योजना बनाते समय इसरो अंतरिक्ष पर्यटन के बारे में नहीं सोच रहा है. सिवन ने कहा कि 2022 तक पहले गगनयान मिशन के बाद इस परियोजना को मंजूरी के लिए सरकार के पास भेजा जाएगा.

उन्हें इस परियोजना के क्रियान्वयन में 5-7 साल लगने की उम्मीद है. हालांकि भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन पर आने वाली लागत के संबंध में उन्होंने कुछ नहीं कहा. फिलहाल पृथ्वी की कक्षा में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन ही एक मात्र ऐसा स्टेशन है जो पूरी तरह काम कर रहा है. यहां अंतरिक्ष यात्री तमाम प्रयोग करते हैं. चीन की भी अपना खुद का अंतरिक्ष स्टेशन बनाने की योजना है.

गौतलब है बीती 15 जून आधी रात को इसरो ने अपना चन्द्रयान2 मिशन लंच किया |जोकि कुछ हफ्ते बाद  चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा |गौरतलब है कि यह चंद्रमा का वह हिस्सा है, जहां आज तक दुनिया का कोई भी अंतरिक्ष यान नहीं उतरा है.

वही यह यह भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी का अब तक का सबसे जटिल मिशन है, जिस पर 1,000 करोड़ रुपये से कम खर्च हुआ है |गौरतलब है की इस मिशन पर 600 करोड़ से कुछ ज्यादा का खर्च हुआ है |

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