पिछला पूरा साल फेसबुक के लिए बहुत बुरा रहा। साल के शुरू में ही फेसबुक के यूजर डेटा चोरी होने की खबरे आनी शुरू हो गयी थी,जो लगभग पूरे साल रह रहकर आती रही। हालांकि फेसबुक ने इस सब से निपटने के लिए हर सम्भव कोशिश की, जिसमे बग्स हटाने से लेकर, प्रभावित अकाउंट डिलीट करने जैसी प्रक्रिया शामिल थी।लेकिन चाहे जो हो इससे एक बार के लिए फेसबुक की साख को नुकसान तो पहुंचा ही था।

परन्तु फिर भी फेसबुक के लिए सबसे अच्छी जो बात यहाँ रही वो है यूजर्स का विश्वास। कि भले ही टेक खबरे भली फेसबुक डेटा चोरी जैसे घटनक्रमो से अटी पड़ी रहती थी जिनका सिलसिला अब भी शायद पूरा रुका नही है,तो यह यूजर्स के विश्वास ही है जो फेसबुक को अब भी टॉप-3 विश्वसनीय साइट्स में एक बनाता है।लेकिन यहां सवाल ये है कि क्या ये वाकई फेसबुक के प्रति विश्वास है या फिर फेसबुक का नशा यानि एडिक्शन ।

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असल मे यह अधिक सच लगता कि फेसबुक ना छूटने का कारण विश्वास नही बल्कि एडिक्शन ही है।तो अगर आप एक फेसबुक एडिक्ट है जो आप अच्छे से जानते होंगे और एक घण्टा भी नही बिता सकते फेसबुक पर दोस्तों के पोस्ट्स देखे बिना तो क्या होगा यदि आपको एक महीना फेसबुक ना मिले? शायद ये आपको एक साधारण सवाल लग रहा हो।

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पर आप सोचिये की आप फेसबुक के बिना एक घण्टा नही बिता पाते और वो फेसबुक एक महीने के लिए दूर होने जा रही है तो आपको कैसा लगेगा?शायद आपके पास इसका कोई सटीक जवाब हो।परन्तु आप परेशान ना हो क्योकि हाल ही में हुई स्टडी इस सवाल का संक्षेप जवाब देती है जो शायद आपके लिए भी जरूरी हो।

कैसे हुई स्टडी–

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यह अध्ययन स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।जिसमें 2488 ($102/यूजर)उन फेसबुक यूजर्स को शामिल किया गया जो दिन में कम से कम एक घण्टा तो फेसबुक चला रहे थे।उनमें से आधो के फेसबुक अकाउंट को मिडटर्म इलेक्शन के समय चार हफ्ते बंद करने को कहा गया।हालांकि वे गैजेट (मोबाइल ,लैपटॉप ) के इस्तेमाल के लिए स्वतंत्र थे।परन्तु चयनित आधो के लिए फेसबुक पूरी तरह प्रतिबंधित थी।जिस पर टेक्स्ट मैसेजेस या अन्य तरीको से अकाउंट निष्क्रियता की जांच की जा रही थी।

क्या रहा परिणाम–

यहां परिणाम बेहद खुशनुमा आये थे।जिन लोगो ने अपने फेसबुक अकाउंट को बंद कर रखा था।उनमें से ज्यादातर ने अपना समय परिवार और दोस्तो के बीच ज्यादा बिताया।वही कुछ ने टेलीविजन देखते हुए ,घूमने आदि में अपना समय व्यतीत किया।वही सबसे बड़ी बात जो यहां देखने को मिली वो थी,इनका पोलिटिकल व्यू(राजनीति दर्शन)।यह बाकी आधो की अपेक्षा अब अचानक से धरातल पर आ गया था

अर्थात अब बेवजह का राजनीतिक ज्ञान लगभग सब का खत्म हो चुका था।जोकि फेसबुक छोड़ने का सबसे बेहतरीन परिणाम था।वही यहां सबसे मजेदार बात यह है कि इन सबका औसत फेसबुक प्रयोग समय एक – डेढ़ घण्टा ही था।परन्तु फिर भी ये जिंदगी के छोटे-मोटे काम(परिवार को समय,घूमना,टीवी)भी ढंग से नही कर पा रहे थे और लगभग सभी वोलेंटियर की जिनके अकाउंट को बंद किया था इस पर अपनी बेहतरीन ,खुशनुमा प्रतिक्रिया रही।

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