फेसबुक से 5 बिलियन डॉलर यानी 35 हजार करोड़ रुपये वसूलने वाला है। यह जुर्माना किसी टेक कंपनी पर अब तक का लगने वाला सबसे बड़ा जुर्माना है। इससे पहले साल 2012 में गूगल पर भी 22 मिलियन डॉलर (154 करोड़ रुपये) का जुर्माना लग चुका है। हालांकि फेसबुक इस जुर्माने के लिए पहले से ही तैयार था,क्योकि इस साल की शुरूआत में फेसबुक ने भी ‘उपयोगकर्ता डेटा व्यवहार’ पर कानूनी निबटारे के लिए 3 बिलियन डॉलर से 5 बिलियन डॉलर का भुगतान करने की उम्मीद जताई थी। एफटीसी ने पिछले साल घोषणा की थी कि उसने कैम्ब्रिज एनालिटिका द्वारा करोड़ों यूजर्स का निजी डेटा चुराने का मामला सामने के बाद फेसबुक के साथ 2011 के गोपनीयता समझौते में अपनी जांच को फिर से शुरू कर दिया है, राजनीतिक सलाहकार कंपनी कैम्ब्रिज एनालिटिका ने 2016 में डोनाल्ड ट्रंप के चुनाव अभियान के लिए काम किया था। हालांकि इस जुर्माने का कंपनी पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।

शुक्रवार को मीडिया रिपोर्ट में कहा गया कि एफटीसी ने निजता का उल्लंघन और यूजर्स के डेटा का गलत इस्तेमाल करने के लिए फेसबुक पर जुर्माना लगाने जा रहा है। हालांकि फेसबुक और एफटीसी दोनों ने ही इस मामले में किसी तरह की टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। रिपोर्टों के अनुसार 3-2 वोटों के साथ इस जुर्माने को मंजूरी दी गई है।
फिलहाल यह मामला जस्टिस डिपार्टमेंट के सिविल डिविजन के पास समीक्षा के लिए चला गया है। यह स्पष्ट नहीं है कि इस प्रक्रिया में कितना समय लगेगा, हालांकि इसे मंजूरी मिलने की पूरी संभावना है।

वैसे तो कई कंपनियों के लिए 5 बिलियन डॉलर की यह रकम उन्हें घुटनों पर लाने के लिए काफी है। लेकिन फेसबुक इतनी कमजोर कंपनी नहीं है। इसने पिछले साल रेवेन्यू में 56 बिलियन डॉलर का निवेश किया था और फेसबुक प्रवक्ता के माध्यम से आई रिपोर्ट के अनुसार इसकी इस साल 69 बिलियन डॉलर निवेश करने की संभावना है।

तो क्या ये समय फेसबुक को गुड बाय कहने का है?

देखा जाए तो सोशल नेटवर्किंग के अपने फायदे और नुकसान है। हालांकि फेसबुक जैसी साइट ज्यादातर बार अपनो को पास और एक दूसरे से जोड़े रखती है वही भारत जैसे देश जहां बेवजह की अफवाहें ज्यादा हो रही में फेसबुक बदनाम होता ही है और सत्य यही है कि उसके यूजर्स का ही किया धरा होता है,जो बेकार में अफवाएं या इरिटेटिंग पोस्ट करते है।पर इसके विपरीत जहां देशों की इडियट बॉक्स वाली भ्रष्ट मीडिया बेकार की खबरों से अपका दिमाग फेरता है ऐसे में फेसबुक जैसा प्लेटफॉर्म एक असली सच ही प्रदर्शित करता है।वही हाल ही कि रिसर्च से ये भी सामने आया है कि फेसबुक डिप्रेशन और तनाव में राहत का काम भी करती है।तो देखा जाए तो फेस बुक को छोड़ना कोई ज्यादा समझदारी भरा निर्णय भी नही होगा।

अब आप यहाँ ये सब पढ़कर कहेंगे कि फेसबुक से यूजर उसकी प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर परेशान है,परन्तु इसका असली सच यही है कि फेसबुक की जगह कोई और ऑप्शन को भी प्राइवेसी मुद्दे से गुजरना होगा,क्योकि इंटरनेट है ही ऐसी जगह ।क्योकि हैकर की निगाह में फेसबुक अपने यूजर बेस के कारण भी हैं।

गौरतलब है कि फेसबुक का इस्तेमाल दुनिया भर में दो अरब से अधिक लोग कर रहे हैं, इस वजह से ये सोशल नेटवर्किंग कंपनी की ग्रोथ इतनी अधिक है। इतने अधिक यूजर्स के साथ ये टॉप कंपनी है। जिस कंपनी के जितने अधिक यूजर्स हो उनको यूजर्स का डेटा उतना अधिक संभालकर रखना चाहिए मगर यहां ऐसा नहीं किया गया जिसकी वजह से फेसबुक पर इतनी बड़ी पेनाल्टी लगाई गई है। जुर्माना की घोषणा के बाद फेसबुक का स्टॉक मूल्य 1.8 प्रतिशत बढ़ गया, लगभग USD 205 पर बंद हुआ, जो कि सभी वर्ष में सबसे अधिक है।कुछ फेसबुक आलोचकों ने तर्क दिया है कि कंपनी को अपने डेटा प्रथाओं की निगरानी सहित सख्त प्रतिबंधों का सामना करना चाहिए, या मुख्य कार्यकारी मार्क जुकरबर्ग को दंड के लिए व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होना चाहिए।

फेसबुक के प्रमुख निक क्लेग ने सरकारों से कंपनियों को काम छोड़ने के बजाय सामाजिक नेटवर्क को नियमित करने के लिए और अधिक करने का आह्वान किया। क्लेग ने बीबीसी के साथ 24 जून को दिए एक साक्षात्कार में कहा यह निजी कंपनियों के लिए नहीं है, यह लोकतांत्रिक दुनिया में लोकतांत्रिक राजनेताओं के लिए है। लेकिन बड़े पैमाने पर सामाजिक नेटवर्क को खत्म करने के लिए कॉल बढ़ रही हैं।

मई में, फेसबुक के सह-संस्थापकों में से एक ने सोशल मीडिया के बेमॉथ को तोड़ने के लिए कहा, यह चेतावनी देते हुए कि ज़करबर्ग बहुत शक्तिशाली हो गए थे। यह फेसबुक को तोड़ने का समय है। द न्यू यॉर्क टाइम्स के लिए एक संपादकीय में क्रिस ह्यूजेस ने कहा, सोशल नेटवर्क को फेसबुक की इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप सेवाओं से अलग करना आवश्यक हो गया था।तो हम कह सकते है कि फेसबुक का बहुत बड़ा(एक बड़े देश की जनसंख्या जितना)यूजर बेस भी इसमे सेंध लगाने का बड़ा कारण है और साथ ही इसमे बग पाए जाने का।

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